Doodara

भाग्यश्री की कहानी

Guest

About this story

भाग्यश्री की कहानी

by Guest · Watercolor · Ages 3–5 · 8 pages

भाग्यश्री ने चमकीला नीला बटन अपने रंगीन बॉक्स में रख दिया। ढक्कन ज़ोर से बंद हुआ — क्लैप! पास बैठी बिल्ली डर गई। भाग्यश्री हँसी और ढक्कन को हल्का थपथपाया।

Read the full story text

भाग्यश्री ने चमकीला नीला बटन अपने रंगीन बॉक्स में रख दिया। ढक्कन ज़ोर से बंद हुआ — क्लैप! पास बैठी बिल्ली डर गई। भाग्यश्री हँसी और ढक्कन को हल्का थपथपाया।

बाहर एक सूखी पीली पत्ती मिली। भाग्यश्री उसे बॉक्स में ठोंकने लगी। छेद छोटा था। उसने ज़ोर लगाया — टख! पत्ती टूट गई।

एक बुजुर्ग आदमी लकड़ी की बाँसुरी लेकर गुज़रा। उसने मुस्कुराते हुए बजाया। भाग्यश्री का बॉक्स खुशी से हिलने लगा। वह आदमी चला गया, भाग्यश्री उसकी धुन के बारे में सोच रही थी।

भाग्यश्री ने बॉक्स खोला। टूटी पत्ती बटन के पास रख दी। अचानक एक चांदी का धागा बाहर गिरा — दोनों को जोड़ रहा था। उसने हैरानी से कहा, 'वाह!'

भाग्यश्री भारी बॉक्स गाँव के चौक में ले गई। उसने सबको दिखाया। सभी मुस्कुराए और अपनी जेब से छोटी-छोटी चीज़ें निकालकर रखने लगे। भाग्यश्री ने बॉक्स को गले लगा लिया।

एक बूढ़ी महिला ने चाबी का गुच्छा निकाला। एक लड़के ने चमकदार पत्थर रखा। एक औरत ने सूखी हल्दीदानী रख दी। सबने अपनी छोटी खज़ाने बाँधीं।

बॉक्स अब और भी भारी हो गया था। भाग्यश्री ने उसे ऊपर उठाया। उसका चेहरा चमक रहा था। उसने सोचा, 'यह मेरा खज़ाना है!' बॉक्स में अब बटन, पत्ती, धागा, चाबी और पत्थर सब थे।

भाग्यश्री बॉक्स लेकर घर लौटी। रास्ते में चांदनी ने उसके पैरों के नीचे सफेद रास्ता बना दिया। उसने बॉक्स को गोद में लेते हुए आकाश की ओर देखा। एक तारा चमका।